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डांडा देवराणा : …तो चढ़ावे की रकम बन रही आस्था में बाधा

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दिलीप कुमार / नौगांव।

यमुना घाटी में परंपरागत व आस्था का प्रतीक कहे जाने वाले डांडा देवराणा मेले के आयोजन के बाद इस बार क्षेत्र में खासी चर्चाओं का दौर जारी है। सूत्रों के अनुसार इस बार अव्यवस्थाओं के कारण काफी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को भगवान रुद्रेश्वर के दर्शन करना नसीब नहीं हो सके।
इस बार डांडा देवराणा मेले के फीके आयोजन को लेकर सूत्रों का कहना है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे पर सुलह सहमति का न बन पाना विवाद की वजह रहा। बजलाड़ी गांव के हरीसिंह का कहना है कि मेले के आयोजन से पूर्व हुई बैठक में रूद्रेश्वर महादेव समिति और पुजारियों के बीच विवाद हो गया था और मेले के आयोजन होने तक सहमति नहीं बन पाई जिसकी वजह से कई श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सालों पुराने इस धार्मिक आयोजन को कुछ लोग अपनी जागीर समझने लगे हैं जिसका असर इस बार देखा गया।
वहीं उत्तराखंड सरकार प्रदेश को पर्यटन प्रदेश बनाने की बात जरूर करती है, लेकिन इसे विडंबना ही कहा जा सकता है कि राज्य गठन से लेकर आज तक यह मंशा धरातली रूप नहीं ले पाई है। पूरे उत्तराखंड में सैकड़ों ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल हैं जहां आज तक सरकार की नजर नहीं गई है, लेकिन स्थानीय लोगों ने आज भी अपनी धरोहरों को संजो के रखा हुआ है, लेकिन डर इस बात का है कि बदलते समय के साथ राजनीतिक, रसूखदारी और जागीरदारी जैसे कारणों के चलते कहीं ऐसे आयोजन अपनी पहचान खो न दें।

Key Words : Uttarakhand, Danda Devrana, Amount of Offerings, Faith

 

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