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संसद व विधानसभा की तरह हो पंचायतों में काम : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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लोकसभा अध्यक्ष ने किया पंचायत प्रतिनिधियों के परिचय कार्यक्रम का शुभारंभ
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पंचायतों सहित सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं का दायित्व है कि वे कार्यपालिका के कार्यों पर नियंत्रण रखते हुए उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करें। इसके लिए पूरे देश में एक स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया जाना चाहिए जिसका अनुसरण देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाएं करें।

डीबीएल ब्यूरो : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि त्रिस्तरीय पंचायतों में लोकसभा और विधानसभा की तरह काम होना चाहिए। अधिकारियों को पंचायत प्रतिनिधियों के सवालों का लिखित जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के साथ देशभर में संवाद के बाद शीघ्र ही इस विषय पर आम सहमति कायम की जाएगी। 

शुक्रवार को चकराता रोड स्थित होटल में उत्तराखंड पंचायतीराज विभाग की ओर से आयोजित पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक की लोकत्रांतिक संस्थाओं को मजबूत और ज्यादा जवाबदेह बनाए जाने की जरूरत है।

इसी क्रम में संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की ओर से देशभर में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का परिचय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत देवभूमि उत्तराखंड से हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र सदियों पुराना है।

अब तक देश में 17 बार लोक सभा और 300 से अधिक बार विधानसभाओं के चुनाव हो चुके हैं और हर बार चुनाव के बाद सत्ता का सहज हस्तांतरण हुआ है। इससे हमारे लोकतंत्र की गहराई का पता चलता है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पंचायतों का काम काज भी लोकसभा, विधानसाभा की तरह होना चाहिए।

इसमें सभी ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित हो, स्थानीय स्कूल के शिक्षक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता सहित कार्यपालिका के अन्य अंग इसमें शामिल होकर विकास योजनाओं में सहयोग प्रदान करें। साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों के सवालों का भी लिखित जवाब दिए जाने की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

पंचायत बैठकों में लिए गए निर्णयों पर कार्य पालिका ठीक से अमल करे। उन्होंने कहा कि पंचायतों में सदन संचालित करने के लिए एक समान मानक बनाए जाने की जरूरत है। इसी तरह साल का सर्वश्रेष्ठ सांसद, विधायक की तर्ज  पर सर्वश्रेष्ठ पंचायत प्रतिनिधि का भी चयन किया जाए।

उन्होंने कहा कि देशभर के पंचायत प्रतिनिधियों से संवाद के अंतिम चरण में दिल्ली में देशभर के जिला पंचायत अध्यक्षों का दो दिवसीय सम्मेलन आयेाजित किया जाएगा। जिसमें पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों पर आम राय कायम की जाएगी। 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वर्चुअल शिरकत करने हुए अपने विचार व्यक्ति किए। मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, सांसद अजय टम्टा, उत्तराखंड के पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. धन सिंह रावत ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

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