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महिला दिवस पर विशेष: ‘‘ इंसानियत ’’ को कायम रखना सिखा रहीं लक्ष्मी मिश्रा

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कुलदीप कुमार

जब कोई जानवर किसी इंसान को मारता या जख्मी करता है तो उसे वहशी करार दिया जाता है, लेकिन इसके पीछे की वजह जानने का प्रयास नहीं किया जाता है। हम भूल जाते हैं कि प्रकृति के चक्र की निरंतरता को कायम रखने में हर जीव जंतु की अपनी अहमियत है। वहीं पालतू जानवरों की बात की जाये तो बहुत से ऐसे जानवर हैं जो सदियों से हमारे मददगार बन कर रह रहे हैं उनके बिना हम अधूरे हैं। जितना स्नेह हम उन्हें देते हैं उससे कहीं ज्यादा वह किसी न किसी स्वरूप में हमें वापस देकर अपनी वफादारी की मिसाल कायम रखे हुए हैं। हमारे समाज में इस तरह के विचारों वाली सख्सीयितों की वजह से शायद आज कहीं न कहीं इंसानियत शब्द की साख कायम है।

हमारी प्रकृति और परिवेश की अनमोल धरोहरों में शामिल जीव जंतुओं को भी हमारी तरह जीने का अधिकार है यह कहना है सामाजिक सरोकारों में संलग्न टीम अभिव्यक्ति की लक्ष्मी जुयाल मिश्रा का। दून के सिद्धार्थ विहार की निवासी लक्ष्मी मिश्रा निरीह और बेजुवानों की न केवल पेट की भूख शांत करती हैं बल्कि कष्ट और बीमारी की हालत में इन्हें अस्पताल पहुंचाकर इंसानियत का फर्ज भी निभाती हैं। कोविड-19 की लाॅक डाउन अविधि के दौरान हर ओर पसरे सन्नाटे के बीच भी उन्होंने अपने आसपास के गली मोहल्ले में जीवन यापन करने वाले बेजुवानों को भूखा नहीं रहने दिया।

पर्यावरण को जीवित रखने की दिशा में भी लक्ष्मी मिश्रा के प्रयास बेहद सराहनीय हैं। दून के ईको ग्रुप के साथ मिलकर वह कूड़े कचरे के सही तरीके से निस्तारण की जानकारी लोगों तक पहुंचा रही हैं। उनका कहना है कि प्लास्टिक के कचरे को इधर-उधर फेंकने की जगह दोबारा इस्तेमाल में लाकर प्लास्टिक की बोतल से ईको ब्रिक बनाकर हम इसका बहुउपयोगी इस्तेमाल कर सकते हैं। उनका बेटा ईको ब्रिक बनाकर उनकी इस मुहिम को साकार बना रहा है।

गरीबों की यथा संभव मदद करना, पक्षियों को दाना-पानी देना जैसे कार्यों से लक्ष्मी मिश्रा समाज को मनुष्य जीवन के भावुक पहलुओं का अहसास दिलाने का काम भी कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि हम अपने परिवार से ही किसी अच्छे कार्य की शुरूआत करें तो आदर्शता की बात प्रबल तरीके से हम लोगों के बीच रख पाते हैं।

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