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काला दिवस – मोदी सरकार की विफल नीतियों के खिलाफ श्रमिक संगठनों ने जताई नाराजगी

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उदय राम ममगाईं / देहरादून

उत्तराखंड राज्य में किसान सभा, सेन्टर आफ इण्डियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमन एसोसिएशन (एआईडब्ल्यूए), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने बीती 26 मई को राज्यव्यापी काला दिवस के रूप में विरोध प्रदर्शन हुये तथा काले झण्डे लगाकर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध जताया। उन्होेंने आरोप लगाया कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार स्वतंत्र भारत में सबसे दिवालिया, बेरहम, सांप्रदायिक, जनविरोधी और कॉरपोरेट समर्थक सरकार साबित हुई है।

किसान सभा, सीटू, एडवा, डीवाईएफआई और एसएफआई मोदी सरकार के अपराधिक दोष और कोविड महामारी से निपटने में उसकी विफलता की निंदा करते हुए काले झंडे लगाकर अपना विरोध दर्ज किया।

ये उठाई मांगें -ः

1) ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाएं और अस्पताल के बिस्तर उपलब्ध कराने के लिए पीएम केयर फंड का बडे़ पैमाने पर इस्तेमाल किया जाये। सेंट्रल विस्टा परियोजना को तत्काल रोका जायेऔर उसी उद्देश्य के लिए अपने धन का उपयोग किया जाये।
2) सभी देश वासियों को मुफ्त में कोविड स्वास्थ्य सुविधाएं दी जायें। सभी का निशुल्क और सार्वभौमिक टीकाकरण हो।
3) सख्ती से निजी अस्पतालों का अधिग्रहण किया जाये जिससे सभी रोगियों को लाभ हो।
4) सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त धन आवंटित करें ।
5) उन सभी परिवारों के खातों में 7500 रुपये तुरंत ट्रांसफर किये जायें जो आयकर या इन्कम टेक्स नहीं देते।
6) सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से दाल, तेल, चीनी आदि आवश्यक वस्तुओं के साथ-साथ छह महीने तक सभी जरूरतमंदों को 10 किलो मुफ्त अनाज दें।
7) काम का विस्तार किया जाये, मनरेगा में मजदूरी बढ़ाई जाये, शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू की जाये।
8) निजी क्षेत्र में नौकरी के नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवजा प्रदान करें।
9) सभी पंजीकृत बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता प्रदान करें।
10) सेमेस्टर फीस सहित सभी फीस निरस्त की जाये। सभी गरीब और सामाजिक रूप से कमजोर छात्रों को सभी शैक्षिक सुविधाएं, आवश्यक गैजेट्स और इंटरनेट सेवाएं मुफ्त प्रदान की जाये।

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