उत्तराखंड

पाॅलीथीन मुक्त ग्रीन दून मिशन: मानव श्रंखला का आयोजन कहीं हिट तो कहीं फ्लॉप

देहरादून/डीबीएल संवाददाता। नगर निगम, देहरादून की ओर से शहर को पाॅलीथिन मुक्त बनाने के लिए ‘पाॅलीथीन मुक्त ग्रीन दून मिशन‘ के तहत आयोजित मानव श्रृंखला कहीं हिट तो कहीं फ्लॉप नजर आई। यह मानव श्रृंखला, मियांवाला से मसूरी डायवर्जन, घंटाघर, जीएमएस रोड, सहारनपुर रोड होते हुए घंटाघर तक बनाई गई। सोशल मीडिया पर इस आयोजन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।

सीएम ने किया लोगों का उत्साहवर्धन –

पाॅलीथीन मुक्त, स्वच्छ एवं सुंदर दून बनाने के उद्देश्य से आयोजित 50 किमी की इस विशाल मानव श्रृंखला में एक लाख से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मियांवाला चैक से राजपुर रोड होते हुए घंटाघर तक मानव श्रृंखला में प्रतिभाग कर रही जनता का उत्साहवर्धन किया। सुबह 10ः00 बजे, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र एवं मेयर सुनील उनियाल गामा ने मानव श्रृंखला में शामिल होकर देहरादून को स्वच्छ-सुंदर एवं पाॅलीथीन मुक्त बनाने के लिए जनता से आह्वान किया। इस मानव श्रृंखला में जनप्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं, शासन एवं प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों तथा स्कूली बच्चों ने प्रतिभाग किया।

मेयर बोले, ‘ दून में 70 फीसदी कम हुआ पाॅलीथिन का इस्तेमाल’ –

मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि स्वच्छ एवं ग्रीन दून के लिए देहरादून नगर निगम द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। पाॅलीथीन के बहिष्कार के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पिछले तीन माह में जन जागरूकता से देहरादून में पाॅलीथीन के उपयोग में 70 प्रतिशत कमी आयी है। उनका कहना है कि जन सहयोग से जल्द ही देहरादून को पूर्ण रूप से सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त किया जायेगा।

स्कूली बच्चों ने निभाई अहम् भूमिका –

मानव श्रृंखला में जनप्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं, शासन एवं प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों एवं स्कूली बच्चों के प्रतिभाग करने का प्रचार किया गया था, लेकिन स्कूली बच्चे निर्धारित समय से लेकर आखिर तक हाथ से हाथ मिलाकर खड़े रहे, जबकि बाकी लोग फोटो और सेल्फी खींचकर खिसकते बने।

जाम की वजह से लोगों की जमकर हुई फजीहत –

मानव श्रृंखला के आयोजन के समय रूट डायवर्ट होने के चलते आॅफिस और जरूरी कार्य से जाने वालों की जमकर फजीहत हुई। लोगों का कहना था कि निगम और सरकार को जनता को जागरूक करने की जगह पाॅलीथिन बनाने वाली कंपनियों पर कार्यवाही करनी चाहिए। कुछ लोगों का यह भी कहना था कि यह आयोजन केवल जनता के पैसे की बर्बादी मात्र है।

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