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कोरोना से लड़ाई – बंदरों व पक्षियों को रहता है उमेश्वर रावत का इंतजार

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देवभूमि संवाददाता

देहरादून। कोरोना वाइरस से जारी लड़ाई में लाॅक डाउन के दौरान जहां एक ओर सूबे की सरकार और स्वयंसेवी लोग गरीबों असहायों के पेट की भूख मिटाने में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर दून के टपकेश्वर मंदिर में हर रोज सुबह उमेश्वर रावत अपने कई साल पुराने नियम के तहत समय पर बंदरों व पक्षियों को खाना खिलाने के नियम पर अडिग हैं। निरीह पशु पक्षी भी उमेश्वर रावत के मंदिर परिसर में पहुंचते ही चहकने लगते हैं।

देहरादून स्थित सर्वे आॅफ इंडिया के पुरातत्व विभाग में कार्यरत एवं नागरिक सुरक्षा कोर देहरादून में 1991 से स्वयंसेवी भाव से अपनी सेवायें दे रहे डिविजनल वाॅर्डन उमेश्वर सिंह रावत किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित उमेश्वर रावत ने देवभूमि लाइव संवाददाता से बातचीत के दौरान बताया कि बीते करीब 13 साल से वह टपकेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आते रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के आसपास रहने वाले बंदर और पक्षी पेट की भूख मिटाने के लिए पूरी तरह से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से मिलने वाले प्रसाद और फलों पर निर्भर रहते हैं।

कोरोना वाइसर के खात्मे के लिए हमारी सरकार के बेहद अहम् फैसलों लाॅकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के तहत घर से बाहर निकलने पर रोक लगाई हुई है। गरीबों व असहाय लोगों को घरों पर ही राशन व जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। उमेश्वर रावत का कहना है कि ऐसे संकट के समय हमारे परिवेश में रहने वाले जीव जंतुओं का ख्याल रखना भी हमारा फर्ज बनता है। इसी दायित्व के निर्वहन के लिए वह लाॅकडाउन में सरकार की ओर से घर से बाहर निकलने की निर्धारित समय सीमा में वह हर रोज मंदिर परिसर में जाकर बंदरों और पक्षियों को फल व दाना खिलाकर आते हैं।