Home उत्तराखंड जागरूकता शिविर : कचरा नियोजन के तरीके बताये

जागरूकता शिविर : कचरा नियोजन के तरीके बताये

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डीबीएल संवाददाता/ देहरादून।

राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के कम्यूनिटी बेस डिजास्टर रिस्क मेनेजमेंट तहत यूएस एड, सीड्स, अभिव्यक्ति सोसाइटी एवं जीएनडीआर की संयुक्त पहल से कचरे के स्वरूप में पैदा हो रही आपदा को कम करने के लिए लोगों को जागरूक किया। इस दौरान ईको ग्रुप के प्रतिनिधियों ने भी कचरे के सही तरीके से नियोजन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। प्रतिभागियों ने कचरे के सही प्रबंधन और वातावरण को साफ सुथरा रखने का संकल्प लिया और आयोजन में मौजूद बच्चों ने पोस्टर बनाकर कचरे की आपदा को खत्म करने का संदेश दिया।

बुधवार को रायपुर विकासखंड के हर्चावाला गांव में आयोजित शिविर में स्थानीय लोगों ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया और कचरा नियोजन के तरीकों की जानकारी हासिल की। दून की अभिव्यक्ति सोसाइटी की टीम अभिव्यक्ति के सदस्यों ने कचरे के सही तरीके से निस्तारण न किये जाने से भविष्य के दुष्परिणामों के बारे में चेताया। टीम की गीतांजलि ढौंढियाल ने कहा कि कचरा नियोजन को लेकर हमें समय रहते अपनी आदतों को सुधारना होगा और कचरे के दोबारा इस्तेमाल के तरीकों पर जोर देना होगा।

दामिनी ममगाईं ने कहा कि प्रकृति के स्वरूप में आ रहे बदलाव के लिए प्लास्टिक और कचरे का सही निस्तारण न करना भी है। उन्होंने कहा कि मानव जनित यह आपदा भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने बताया कि कचरे की इस आपदा से हमारे परिवेश में रहने वाले जीवजन्तु भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।

लक्ष्मी मिश्रा ने बताया कि घर से उठने वाले कचरे को ट्रेन्चिंग ग्राउंड में ले जाकर उसका प्रबंधन किया जाता है लेकिन हर दिन घर से निकलने वाले कचरे की मात्रा इतनी अधिक होती है कि यह कार्य समय रहते नहीं हो पाता। इसके लिए हमें अपने घर से ही सूखे और गीले कचरे का नियोजन करना सीखना होगा

आयोजन में ईको ग्रुप के सदस्य आशीष गर्ग, संजय भार्गव एवं एके मेहता ने प्लास्टिक के खतरों और इसके दोबारा इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। बोतल में प्लास्टिक के कचरे को एकत्र कर प्लास्टिक ब्रिक बनाने के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया। ईको ग्रुप द्वारा दून के कई स्थानों पर प्लास्टिक ब्रिक से बनाई गईं बैंच का निर्माण भी किया गया है।

शिविर के सफल आयोजन में क्षेत्र की नामित पार्षद सुनीता थापा, विनीता देवलाल, प्रकाश मल्ल आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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