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सराहनीय पहल: विशेष बच्चों का अस्तित्व सॅवार रही दून की यशोदा फाॅउंडेशन – स्कूल बस की है दरकार !

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डीबीएल ब्यूरो

विशेष बच्चों के अस्तित्व और आत्मविश्वास को कायम रखने, उन्हें आमआदमी की तरह सहज जिंदगी जीने की राह पर लाने के प्रयास का बीड़ा उठाया है देहरादून की यशोदा फाउंडेशन ने। बीते करीब 7 साल से खुद के संसाधनों से फाउंडेशन ने अपने इस सफर को जारी रखा हुआ है। घर से स्कूल पहुंचना इन विशेष बच्चों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रही यशोदा फाउंडेशन को एक स्कूल बस की दरकार है।

हमारे देश में दिव्यांगों के हित में बने ढेरों अधिनियम संविधान की शोभा जरूर बढ़ा रहे हैं, लेकिन व्यवहार के धरातल पर देखा जाए तो आजादी के सात दशक बाद भी समाज में दिव्यांगों की स्थिति शोचनीय ही है। दिव्यांगजनों के शिक्षा, स्वास्थ्य और संसाधन के साथ उपलब्ध अवसरों को उन तक पहुंचाने की सरकार की कोशिशें नाकाफी नजर आती हैं। वहीं दूसरी ओर सामाजिक सरोकारों की दिशा में कार्यरत कुछ संस्थायें दिव्यांगजनों के अस्तित्व को कायम रखने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के कार्य में प्रयासरत तो हैं लेकिन कमजोर आर्थिक स्थित व संसाधनों की कमी इस राह में सबसे बड़ी बाधा है।

विशेष बच्चों के अस्तित्व और आत्मविश्वास को कायम रखने, उन्हें आमआदमी की तरह सहज जिंदगी जीने की राह पर लाने के प्रयास का बीड़ा उठाया है देहरादून की यशोदा फाउंडेशन ने बीते करीब 7 साल से खुद के संसाधनों से फाउंडेशन ने अपने इस सफर को जारी रखा हुआ है। घर से स्कूल पहुंचना इन विशेष बच्चों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। शायद यही वजह है कि आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रही यशोदा फाउंडेशन को एक स्कूल बस की दरकार है।

देवभूमि लाइव न्यूज पोर्टल से बातचीत के दौरान फाउंडेशन की संस्थापक यशोदा नेगी ने बताया कि विशेष बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लक्ष्य के साथ शारीरिक व मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए डोइवाला ब्लाॅक स्थित चाॅदमारी में 2012 में अस्तित्व स्पेशल स्कूल की स्थापना की गई। फाउंडेशन की सचिव कविता राणा ने बताया कि वर्तमान में आसपास के क्षेत्र के 34 बच्चे स्कूल में पंजीकृत हैं। बच्चों के इस विशेष स्कूल में शारीरिक उपचार, पढ़ाई व प्रशिक्षण के साथ उन्हें खेलने के अवसर प्रदान कर उन्हें सशक्त व मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। स्कलर्निंग वाइल डूइंग के सिद्धान्त पर स्कूल में बच्चों को जीवन की जरूरतें सिखाने के अलावा आसपास के वातावरण को समझने के लिए भी तैयार किया जाता है।

यशोदा फाउंडेशन द्वारा स्थापित चाइल्ड डवलेपमेंट सैंटर में विशेष बच्चों को दी जाने वाली निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत फिजियो व आॅक्यूपेशनल थेरेपी की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। 14-21 साल के दिव्यांग किशोरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली एवं जीवन यापन के लिए जरूरी दक्षताओं का प्रशिक्षण भी समय-समय पर दिया जाता है।

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