Home उत्तराखंड हिम संवाद – धरातल पर कार्य होगा तब ही बचेगा पर्यावरण

हिम संवाद – धरातल पर कार्य होगा तब ही बचेगा पर्यावरण

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रुद्रप्रयाग। शहरी इलाकों में एयर कंडीशनर रूम में बैठकर पर्यावरण संरक्षण की बातें की जाती हैं। ऐसे में पर्यावरण को बचाया नहीं जा सकता है। धरातल पर कार्य करने से ही पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। रानीगढ़ पट्टी के कोट-मल्ला में अपनी सैकड़ों नाली निजी भूमि पर मिश्रित वन का संरक्षण कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् जगत सिंह  जंगली ने यह बात कही।

सेवा इंटरनेशनल की इकाई सेवा साहस की ओर से उत्तराखण्ड वन विभाग एवं बीएसएफ के ब्रांड एम्बेसडर जगत सिंह जंगली के स्वरोपित मिश्रित वन कोट-मल्ला में हिम संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण पर्यटन विकास एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर खाका तैयार किया गया। इस अवसर पर पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने कहा कि एयर कंडीशनर रूम में बैठकर पर्यावरण की बात की जाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि पर्यावरण के क्षेत्र में धरातल पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। यदि सरकार की ओर से इस दिशा में धरातल पर कार्य किया जाता तो आज समस्या विकट नहीं होती।

उन्होंने कहा कि सरकार को पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने की जरूरत है। जो व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे वह अन्य लोगों को भी प्रेरित कर सके। जंगली ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन की अपार संभावनाएं है। ग्रामीण इलाकों में पर्यटन को तभी बढ़ावा मिल सकता है, जब यहां विकास किया जा सके। मूलभूत सुविधाओं का अभाव आज भी ग्रामीण इलाकों में साफ देखा जा सकता है।

दीप इंडिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पीएस रावत ने कहा कि पर्यटन को विकृतियों से बचाने के लिए इकोफ्रैंडली, सोसियो फ्रैंडली एवं मर्यादित पर्यटन विकास की आवश्यकता है। पर्यटन व्यवसायी शलभ गहलोत ने कहा कि जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं है। इन संभावनाओं को तलाशने की आवश्यकता है।

सेवा इंटरनेशनल के परियोजना प्रबंधक अभिषेक कुमार ने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट के लिए सरकार को व्यवस्था करनी होगी। इस मौके पर लक्ष्मण सिंह, देव सिंह, मनोज बेंजवाल, विजय रावत, लोकेन्द्र बलोदी आदि मौजूद थे।

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