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अनूठी पहल – तीर्थयात्रियों को प्रयोग करने दिए अपने घरों के शौचालय !

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पंकज भार्गव

महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर में आयोजित एक धार्मिक महोत्सव में अनूठी पहल देखने में आई है। जिला प्रशासन के अनुरोध पर प्रसिद्ध वारी तीर्थमार्ग पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने 15 दिन की उक्त धार्मिक यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को अपने घरों के शौचालय प्रयोग करने दिए।

सामाजिक सरोकार से जुड़े किसी भी मिशन की कामयाबी के लिए सामूहिक पहल सबसे अहम् है। हाल ही में महाराष्ट्र में हर साल की तरह इस बार भी धार्मिक तीर्थयात्रा वरकारी के आयोजन में 10 लाख से अधिक तीर्थयात्री शामिल हुए। 250 किमी की इस वार्षिक तीर्थयात्रा का शुभारंभ ज्ञानेश्वर से होकर हिन्दू देवता विठोबा के स्थान पंढरपुर में सम्पन्न हुआ। प्रदेश सरकार ने यात्रा मार्ग पर तीथयात्रियों के लिए सामूदायिक शौचालय बनवाये हुए हैं लेकिन उनकी संख्या के आगे यह पर्याप्त नहीं थे। ऐसे में जिला प्रशासन के अनुरोध पर वारी तीर्थ मार्ग पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने तीर्थयात्रियों के लिए अपने घरों के शौचालय प्रयोग के लिए खोल दिए।

स्वच्छ भारत मिशन की कामयाबी के लिए लोगों की खुले में शौच की आदत को बदलना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा खासकर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में इस कुप्रथा से निपटने के लिए भरकस प्रयास जारी हैं, लेकिन उत्तराखंड जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले राज्यों की बात करें तो यहां तकरीबन वर्ष भर तीर्थयात्रियों का आवागमन लगा रहता है जिसके चलते प्रदेश सरकार द्वारा तीर्थयात्रियों के लिए मुहैया कराई जाने वाली सुख सुविधायें तीर्थयात्रियों की संख्या के आगे बौनी साबित होती नजर आती हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को तीर्थयात्रियों द्वारा छोड़ी गई गंदगी का खामियाजा भुगतना पड़ता है। सुविधाओं की कमी के चलते तीर्थयात्री भी मजबूरीवश जहां तहां शौच व अपने साथ लाए सामान को बिखेरकर चलते बनते हैं।

उत्तराखंड पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार हाल ही में हरिद्वार में सम्पन्न हुए कांवड़ मेले में देशभर से करीब 03 करोड़ से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे। सवाल उठना लाजमी है कि क्या प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गईं सार्वजनिक सुविधायें तीर्थयात्रियां की तादाद के हिसाब से पर्याप्त रही होंगी। पूर्व में आयोजित कांवड़ महोत्सवों के दौरान स्वच्छता को लेकर हरिद्वार के स्थानीय लोगों के अनुभव तो बेहद निराशाजनक रहे हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित खबर के आंकड़ों पर गौर फरमायें तो 2017-18 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार 02 अक्टूबर, 2014 को शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिन आठ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया उनमें उत्तराखंड भी शामिल है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या उत्तराखंड राज्य को यह दर्जा दिए जाने के लिए प्रदेश की आबादी को आधार मानने के साथ यहां आने वाले अप्रत्याशित तीर्थयात्रियों को भी शामिल किया गया होगा।

उत्तराखंड में स्वच्छता अभियान की राह तीर्थयात्रियों की अप्रत्याशित आवक के चलते किसी चुनौती से कम नहीं है। स्वच्छता की इस मुहिम की कामयाबी के लिए जहां स्थानीय लोगों को आगे आना होगा वहीं तीर्थयात्रियों को भी जागरूक करने की जरूरत है।

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