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यमुनाघाटी में स्पीड गवर्नर के विरोध में टैक्सी चालकों की हड़ताल – उत्पीड़न का लगाया आरोप

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कुलदीप शाह/बड़कोट। टैक्सियों में गति नियंत्रक (स्पीड गवर्नर) लगाये जाने के विरोध में प्रदेश भर के टैक्सी मालिक व चालक अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए हैं। आज से शुरू हुई इस हड़ताल का असर यमुनाघाटी में भी देखने को मिला जिसके चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। टैक्सी मालिकों एवं चालकों ने उप जिलाधिकारी बड़कोट को सौंपे ज्ञापन में अनावश्यक रूप से उत्पीड़न का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने चक्का जाम करने की चेतावनी दी है।

गौरतलब है कि सड़क हादसे में ओवर स्पीड को जिम्मेदार मानते हुए शासन ने परिवहन विभाग को टैक्सियों में स्पीड गवर्नर लगाए जाने के निर्देश दिए थे जिसके विरोध में पूरे प्रदेश के टैक्सी चालकों ने हड़ताल शुरू कर दी है। यमुनाघाटी के बड़कोट में टैक्सियों में स्पीड गवर्नर लगाए जाने के विरोध में टैक्सी चालक भी हड़ताल पर चले गए हैं।  उनका कहना है कि परिवहन विभाग मनमाने रूप से टैक्सियों में स्पीड गवर्नर लगाकर वसूली कर रहा है। मामले में उप जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में टैक्सी चालकों ने मांग की है कि परिवहन विभाग की इस पहल पर रोक लगाई जाए।

वर्तमान समय में सूबे में खासकर गढ़वाल मंडल में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ व हेमकुंड साहिब की यात्रा चरम पर है।जिससे ब्रांच रूटों पर पहले से ही वाहनों का टोटा होने के कारण जनता को आवागमन करने में काफी दिक्कतें हो रही थीं। टैक्सी चालकों के हड़ताल पर चले जाने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

टैक्सी में तकनीकि समस्या के साथ दाम से अधिक वसूली का आरोप :

टैक्सी यूनियन से जुड़े भगत सिंह रावत का कहना है कि 2 हजार रुपये की कीमत वाले गति नियंत्रक की आड़ में 6 से 10 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं। उनका कहना है कि गति नियंत्रक लगाए जाने के बाद पहाड़ों में न तो टैक्सी ठीक से स्टार्ट हो पा रही है और ना चढ़ाई पर गति पकड़ पा रही है। साथ ही वाहन चढ़ाई पर धुआं देने के बाद बंद होने की समस्या भी आ रही है। उनका यह भी कहना है कि गति नियंत्रक लगाये जाने के बाद टैक्सी के फ्यूल पंप में भी शिकायत बढ़ गई है।

पहाड़ में आवागमन के लिए टैक्सियां बेहद अहम् :

पहाड़ों में समाचार पत्र पहुंचाने, शिक्षकों को समय पर स्कूल छोड़ने व स्थानीय लोगों के आवागमन में टैक्सियों की भूमिका बेहद अहम् है। चार धाम यात्रा में बसों के लगने के बाद जिले की सड़कों पर ग्रामीणों की आवाजाही भी इन्ही टैक्सियों के भरोसे है।

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