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नौगांव के थली गांव में जीवन दांव पर लगाकर स्कूल पहुंच रहे छात्र

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शान्ति टम्टा
बड़कोट/उत्तरकाशी। मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं नौगांव ब्लॉक का थली गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं की राह तक रहा है। इस गाँव के ग्रामीण सराकार से गुहार लगाकर थक चुके हैं लेकिन आज तक विकास के नाम पर वायदों और घोषणाओं के अंबार लगा चुकीं प्रदेश की सरकारें इस गांव में सुविधा के नाम पर न कोई सड़क दे पाई और न ही सुरक्षित आवागमन के लिए पुल निर्माण कर सकीं।

थली गांव में जीवन दांव पर लगाकर बच्चों को स्कूल जाता देखकर विकास की बात करने वाली उत्तराखंड सरकार की कथनी और करनी को समझा जा सकता है। सड़क तो दूर की बात है यहां बहने वाली थलनदी पर पुल निर्माण न होने से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को बल्लियों का सहारा लेकर कमल नदी को पार करने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान थलनदी में तेज बहाव के ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थायी पुल भी बह जाता है जिससे हालात और भी दयनीय हो जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि हर रोज़ 50 स्कूली बच्चों को गाँव से नौगांव बाज़ार तक आने में जर्जर संपर्क मार्ग स्यूली पुल की जीर्णशील हालत से होकर लगभग सात किमी अतिरिक्त सफ़र तय करना पड़ता है। मार्ग में पड़ने वाले गोलना डंगार से लगातार पत्थर गिरने का भय और साथ ही मार्ग के जंगल से सटे होने के कारण जंगली जानवरों का भी भय बना रहता है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि वर्ष 1997-98 में पर्वतीय विकास मंत्री बर्फियां लाल जुवांठा के कार्यकाल में पुरोला रोड से साडा तोक तक सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली थी लेकिन पुल न होने के कारण यह सड़क भी आधी-अधूरी ही बन पाई और आज यह सड़क बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

Key Words : Uttarakhand, Uttarkashi, Barkot, Naogaon, Thali Village, Student

 

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