Home अपना दून दिव्यांगता और समावेशित विकास कार्यशाला में बांटे अनुभव

दिव्यांगता और समावेशित विकास कार्यशाला में बांटे अनुभव

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देहरादून। उत्तराखंड में दिव्यांगजों को स्वावलंबी और उन्हें अधिकार संपन्न बनाने के लिए अन्र्तराष्ट्रीय संस्था सीबीएम ने हाथ बढ़ाया है। सीबीएम ने राज्य की संजीवनी संस्था को धरातल पर कार्य करने के लिए चयनित किया है। हंस फाउंडेशन भी इस मुहिम में आर्थिक सहयोगी के रूप में अपना समर्थन प्रदान करेगी। उत्तराखंड में दिव्यांगजनों को अधिकार सम्पन्न बनाने के लिए सीबीएम की ओर से विभिन्न राज्यों में इस क्षेत्र में कार्य कर रहे सामाजिक संगठनों की तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है।

मंगलवार को दून के एक होटल में दिव्यांगों के हितों पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों सहित उत्तराखंड के सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यशाला के दूसरे दिन उत्तराखंड ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव युगल किशारे पंत ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने सीबीएम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड में दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थियों के मद्देनजर ठोस रणनीति बनाये जाने की जरूरत है, जिसके लिए सीबीएम और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका अहम् साबित हो सकती है। एसआरएलएम के श्री प्रभाकर ने स्वयं सहायता समूहों में दिव्यांगजनों की भागीदारी पर जोर दिया।

कार्यशाला में बंगलूरू से आए दिव्यांगजन कम्यूनिटि के प्रशिक्षकों मोहन जी और जयकुमार ने दिव्यांगों से जुड़े अपने अनुभवों को बताते हुए उनके समावेशित विकास सम्बंधी महत्वपूर्ण टिप्स प्रतिभागियों को दिए। उन्होंने कई प्रयोगों के माध्यम से अपनी बात को समझाया।

सीबीएम के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर दिनेश राणा ने बताया कि सीबीएम उत्तराखंड में भी दिव्यांगजनों को स्वावलंबी और अधिकार सम्पन्न बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर दिव्यांजन को समाज में भेदभाव भरे लहजे से देखा जाता है। उनकी डिजिबिलिटी के आधार पर उन्हें इंस्ट्यिूसनल सर्विसेज प्रदान कर उनकी प्रतिभा को हाशिये पर पहुंचा दिया जाता है। जबकि सीबीएम की सोच यह है कि दिव्यांगजन जिस समुदाय में रहता है उसके जीवन को वहीं सार्थक और सशक्त बनाया जाए।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत 07 सितंबर, 2017 को ‘डिजीबिलिटी इन्क्लूजिव प्रमोशन आॅफ लाॅइवलीहुड इन द हिल्स’ कार्यक्रम का शुभारंभ करने के लिए अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।

उत्तराखंड के तीन जिलों में संचालित होगा कार्यक्रम:
देहरादून। ‘डिजीबिलिटी इन्क्लूजिव प्रमोशन आॅफ लाॅइवलीहुड इन द हिल्स’ कार्यक्रम प्रथम चरण में सूबे के अल्मोड़ा जनपद के स्याल्दे एवं चैखटिया ब्लाॅक, रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ और देहरादून जिले के चकराता ब्लाॅक में संचालित किया जाएगा।

Key Words : Uttarakhand, Dehradun,  Divyangata, Inclusive Development, Workshop

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