उत्तराखंड

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की जद में आएंगे 47 गांवों के 411 भवन

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को सचिवालय में ऋषिकेशकर्णप्रयाग रेल लाइन के कार्यों की समीक्षा की। बैठक में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रेल विकास निगम लिमिटेड के अधिकारी भी मौजूद थे। रेल लाइन परियोजना के सभी जनपदों के जिलाधिकारी वीडियो कोंफ्रेंसिंग के द्वारा मीटिंग से जुड़े रहे।
 मुख्यमंत्री रावत ने ऋषिकेश में प्रस्तावित रेल पुल के लिए यूपीसीएल, पिटकुल और जल संस्थान को तय समय सीमा के अंदर विद्युत और पेयजल लाइन शिफ्ट करने के निर्देश दिए। यूपीसीएल ने 90 दिन में तथा जल संस्थान ने 30 दिन में लाइन शिफ्टिंग कार्य पूरा करने का वचन दिया। रेल पुल के फाउंडेशन कार्य के लिए निर्धारित जगह वन विभाग 03 दिन में खाली कर देगा और शेष जमीन 30 दिन में खाली कर देगा। अभी वहाँ वन विभाग का फॉरेस्ट रेंज ऑफिस है। कुल 05 करोड़ रुपए चारों जनपदों चमोली, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी में उनकी भागीदारी के अनुरूप प्रशासनिक खर्चो के लिए बाँटा जाएगा।
 मुख्यमंत्री रावत ने प्रभावित भवनों के मुआवजे के निर्धारण हेतु व्यावहारिक और  जनता के प्रति संवेदनशील मानक तय करने के निर्देश दिए। प्रारम्भिक आँकड़ो के अनुसार चारों जनपदो में 47 गांवों में, 411 भवन रेल लाइन की जद में आएँगे। हालाँकि जनपदों की अंतिम पुनर्वास विस्थापन  नीति  जारी होने तक ये आँकड़े घट बढ़ सकते हैं। बैठक में बताया गया कि चमोली जनपद में अक्टूबर तक और अन्य तीन जनपदों में दिसम्बर तक मुआवजा घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। ऋषिकेशकर्ण प्रयाग प्रोजेक्ट को नेशनल प्रोजेक्ट घोषित करने के विषय पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि वह स्वयं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस हेतु अनुरोध करेंगे।
 बैठक में अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव डॉ. उमाकांत पवाँर, सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम, कमिश्नर गढ़वाल मण्डल विनोद शर्मा एवं अरविंद सिंह हयांकी सहित उत्तराखंड सरकार और आरवीएनएल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
Key Words : Uttarakhand, Dehradun, CM Meeting, Rishikesh-karnaprayag, Railline
 

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