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पूवर्जों का सम्मान हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग – व्यास पं. भगवती प्रसाद फोन्दणी

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देहरादून। देवभूमि में रहने वाला हर व्यक्ति बेहद सौभाग्यशाली है। यह स्थान देवों की तपभूमि रहा है जिसके चलते यहां आज भी धार्मिक परम्पराओं की अपनी मर्यादा और अस्तित्व जीवित है। यह बात श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान व्यास पं. भगवती प्रसाद फोन्दणी ने कही। उन्होंने कहा पूर्वजों और बड़ों का आदर करना हमारी संस्कृति का अटूट रहा हिस्सा है। इस धरोहर को संरक्षित व कायम रखना हम सभी का कर्तव्य है।

कंडोली निवासी सुरेन्द्र प्रसाद रतूड़ी द्वारा अपने पूज्य पिताजी स्व. जगेश्वर प्रसाद रतूड़ी के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन शिव मंदिर कंडोली, चिड़ौंवाली रोड में सम्पन्न किया जा रहा है। कथा वाचक व्यास पं. भगवती प्रसाद फोन्दणी विगत 13 सितंबर से श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा के संस्मरणों का ज्ञान दे रहे हैं।

सोमवार को व्यास पं. भगवती प्रसाद फोन्दणी ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण की बाल कथा के संस्मरण सुनाए। उन्होंने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके अत्याचारी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा।

श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन शाम 4.00 बजे से 6.00 बजे तक किया जा रहा है। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु हर रोज पहुंच रहे हैं। कथा का समापन 19 सितंबर को दोपहर 12.00 बजे होगा जिसके बाद बह्मभोज का आयोजन किया जाएगा।

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