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शिक्षक के तबादले पर छात्रों के साथ अभिभावकों की आंख भी हुई नम

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उत्तरकाशी/डीबीएल संवाददाता।  जब कोई शिक्षक अपने व्यवहार और पढ़ाने के कौशल से बच्चों में छाप छोड़ जाता है तो उसकी विदाई पर बच्चों का रोना लाजमी है लेकिन क्या कभी आपने यह सुना है कि किसी टीचर की विदाई पर गांव का हर एक शख्स बड़ा-बुढ़ा, महिलाएं और बच्चे रोने लगे। यह महज एक खबर नहीं है बल्कि हमारे समाज के लिए एक आईना है। यह कहानी है संघर्ष, समर्पण, ईमानदारी और कर्तव्य की।
उत्तरकाशी जिले के केलसु घाटी में शिक्षक आशीष डंगवाल की विदाई कुछ इस ढंग से हुई कि इस विदाई की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। स्कूल में रोते बिलखते बच्चे और इन बच्चों की आंखों में आंसू उस शिक्षक के लिए हैं जिसने इनकी जिंदगी ही बदल दी लेकिन इन छात्रों को अफसोस इस बात का है कि इनके फेवरेट शिक्षक आशीष का यहां से ट्रांसफर हो गया है। सभी छात्रों की जुबान पर एक ही बात है कि सर जी हमें छोड़कर मत जाओ।

वहीं शिक्षक आशीष डंगवाल ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर क्षेत्र के लोगों और बच्चों के लिए लिखा कि “मेरी प्यारी केलसु घाटी, आपके प्यार, आपके लगाव, आपके सम्मान, आपके अपनेपन के आगे, मेरे हर एक शब्द फीके हैं । क्षेत्र के समस्त लोगों ने जो स्नेह मुझे दिया मैं आपका ऋणी हो गया हूँ। मेरे पास आपको देने के लिये कुछ नहीं है, लेकिन केलसु घाटी हमेशा के लिए अब मेरा दूसरा घर रहेगा ट्रांसफर होने के बाद शिक्षक आशीष की विदाई में एक-दो नहीं बल्कि पूरा गांव रोया।  देश के ज्यादातर सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहद खराब है। ऐसे में जरूरत है आशीष डंगवाल जैसे शिक्षकों की जिनके जाने मात्र से स्कूल के बच्चे और क्षेत्र के लोग रोने भी बिलखने लगे। इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस शिक्षक का क्या महत्व रहा होगा इस इलाके में।

देश के ज्यादातर सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहद खराब है। ऐसे में जरूरत है आशीष डंगवाल जैसे शिक्षकों की जो छात्रों के अलावा उनके अभिभावकों के दिलों में भी अपने कर्तव्य और व्यवहार कुशलता की छाप को अमिट कर रहे हैं। 

 

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