Home अपना दून पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

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गांवों का नगर निगम में विलय प्रकरण : 
देहरादून। नगर निगम देहरादून के विस्तारीकरण परियोजना के तहत जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों को नगर निगम में विलय किए जाने को लेकर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का आक्रोश जारी है। सोमवार को उन्होंने कचहरी स्थित शहीद स्मारक परिसर में धरना-प्रदर्शन किया और विभिन्न ग्राम पंचायतों को निगम में शामिल न किए जाने को लेकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा।
दून के कई गांवों को निगम में शामिल किए जाने का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। सोमवार को सूचीबद्ध किए गए निगम में शामिल होने वाले कई गांवों के ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने ेत्रिस्तरीय पंचायत गांव बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले शहीद स्मारक परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
गांव बचाओ संघर्ष समिति की संरक्षक व ब्लॉक प्रमुख रायपुर बीना बहुगुणा ने गांवों को निगम में शामिल किए जाने को साजिश बताते हुए कहा कि सरकार की मंशा तो गांवों का विकास करना है लेकिन प्रदेश के नौकरशाह सरकार को बरगलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में इस साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समिति के अध्यक्ष घनश्याम पाल ने कहा कि गांवों को शहर बनाना किसी भी तरह से सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को सही व्यक्ति तक पहुंचाने में ग्राम पंचायतों की भूमिका अहम है। गांव के मिनी सचिवालय में हर रोज लोगों को बिना परेशानी के विभिन्न प्रमाणपत्र उपलब्ध कराये जाते हैं। साथ ही गांव के छोटेमोटे विवादों को ग्राम पंचायत स्तर पर ही निपटा लिया जाता है।
रायपुर ब्लॉक अन्तंर्गत डांडा लखौण्ड के ग्राम प्रधान व समिति के सोशल मीडिया प्रभारी अभिषेक पंत ने कहा कि प्रदेश की संस्कृति और पहचान को संजोकर रखे गांवों का शहरीकरण किसी भी दशा में ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की गांवों में रोजगार मुहैया कराने की विभिन्न योजनाओं के तहत गांव में युवा आज भी स्वरोजगार कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गांवों का शहरीकरण होने से बेरोजगारी बढ़ेगी।
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को प्रस्तावित ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को खारिज करने को लेकर एक मांग पत्र भी सौंपा।
धरना-प्रदर्शन में समिति के उपाध्यक्ष राजेश परमार, सचिव हेमा पुरोहित, कोषाध्यक्ष हरी प्रसाद भट्ट, प्रवीण पुरोहित, प्रधान शबनम थापा, राजेश कुमार, घनीमाला ठाकुरी, सारिका, पूजा नेगी, बिमलेश देवी, हरीश अग्रवाल सहित कई गांवों के ग्रामीण मौजूद थे।

Key Words : Uttarakhand, Dehradun. Village merging in Municipal Corporation

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