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दून में ‘बाल शिक्षा एवं सुरक्षा’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित : पोक्सो एक्ट के मामलों में 24 घंटे में हों बयान दर्ज – खण्डूड़ी

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देहरादून। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के तत्वावधान में ‘बाल शिक्षा एवं सुरक्षा’ विषय पर आयोजित राष्ट्र स्तरीय कार्यशाला में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य विषयों पर मंथन किया गया। कार्यशाला में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रुति नारायण कक्कड़ ने बच्चों के अधिकारों के लिए राज्य आयोग के अध्यक्षों से जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करने की अपील के साथ उत्तराखंड में इस दिशा में किए जा रहे कार्यों को सराहा। कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्षों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

गुरूवार को कॉलागढ़ रोड स्थित ओएनजीसी ऑडिटोरियम में उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से आयोजित कार्यशाला में बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर गहन मंथन किया गया। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रुति नारायण कक्कड़ ने कहा कि पोक्सो कानून को सख्ती से लागू किए जाने के लिए सरकार से मांग की जाएगी। उन्होंने देश के कई राज्यों में बाल अधिकारों और बच्चों के साथ होने वाले शोषण के मामलों में राज्य बाल आयोग को जिम्मेदारी और सख्ती के साथ मामलों की पैरवी करने की बात कही।

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेन्द्र खण्डूड़ी ने कहा कि बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, शिक्षा और उनकी सुरक्षा की दिशा में बहुत कार्य किए जाने की जरूरत है। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष से आग्रह किया कि इन बिंदुओं पर कानून को देशभर में जल्द से जल्द लागू किया जाए। खण्डूड़ी ने पोक्सो कानून के तहत त्वरित कार्यवाही किए जाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि पोक्सो कानून के तहत पीड़ित बच्चे का बयान 20 घंटे के भीतर दर्ज किए जाने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे दोषी मामले में उलटफेर न कर सकें। बच्चियों के साथ देश में बढ़ती दरिंदगी की घटनाओं को रोकने के लिए पोक्सो एक्ट-2012 में सरकार द्वारा किए गए बदलाव के तहत 12 साल तक की बच्चियों से रेप के दोषियों को मौत की सजा के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी को उन्होंने सराहनीय कदम बताया। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर शीघ्र अध्यादेश लाने की मांग भी की।

कार्यशाला के दौरान दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, मणिपुर, पश्चिमी बंगाल आदि राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्षों ने भी अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।

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