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गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए हुए बंद

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उत्तरकाशी। विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट गुरुवार को विधि-विधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसके बाद मां गंगा की उत्सव डोली शीतकालीन पड़ाव मुखीमठ (मुखवा) के लिए रवाना हुई। डोली शुक्रवार को मुखवा पहुंचेगी। आगामी छह माह तक मुखवा स्थित मां गंगा मंदिर में ही मां गंगा की पूजा अर्चना की जाएगी।

उत्तराखंड में आस्था की प्रतीक इस साल की चारधाम यात्रा अब समापन की ओर है। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद अब यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट शुक्रवार भैयादूज के अवसर पर बंद होंगे। बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को बंद होंगे। गुरुवार को अन्नकूट पर्व के शुभ मुहूर्त पर गंगोत्री धाम में सुबह उदय बेला पर मां गंगा के मुकुट को उतारा गया। इस बीच श्रद्धालुओं ने मां गंगा की भोग मूर्ति के दर्शन किए। दोपहर 12.30 बजे अमृत बेला के शुभ मुर्हूत पर कपाट बंद किए गए। डोली में सवार होकर गंगा की भोगमूर्ति जैसे ही मंदिर परिसर से बाहर निकली तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।

महार रेजिमेंट के जवानों के बैंड की धुन और परंपरागत ढोल दमाऊं की थाप के साथ तीर्थ पुरोहित गंगा की डोली को लेकर शीतकालीलन प्रवास मुखवा गांव के लिए पैदल रवाना हुए। रात्रि विश्राम के लिए गंगा जी की डोली रात्रि विश्राम के लिए मुखवा से चार किमी पहले चंदोमति के देवी के मंदिर में पहुंची। नौ नवंबर की सुबह गंगा जी की डोली मुखीमठ स्थित गंगा मंदिर में पहुंचेगी।

मुखवा गांव उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 78 की दूरी पर स्थित है। यह गांव सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। इस गांव में साढ़े चार सौ परिवार रहते हैं। यहां परंपरागत शिल्प से तैयार लकड़ी के मकान अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है। मान्यताओं के अनुसार, वानप्रस्थ के दौरान विचरण करते हुए पांडव मुखबा गांव पहुंचे थे और यहां पर उनका प्रवास रहा था।

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