Home व्यक्तित्व बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर मिसाल बने हिमरोल के भरत राणा

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर मिसाल बने हिमरोल के भरत राणा

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शांति टम्टा
मन में दृढ़ इच्छा शक्ति हों तो कठिन काम भी आसान हो जाता है इस बात की मिसाल पेश की है नौगांव विकास खंड के हिमरोल गांव निवासी भरत सिंह राणा ने। महज कक्षा 8 पास इस कास्तकार ने क्षेत्र के लोगों को सामुहिक चकबंदी के लिए प्रेरित किया और खुद की बंजर पड़ी जमीन पर एक हेक्टेयर का चेक तैयार किया। इस बंजर भूमि भूमि पर उन्होंने जो कर दिखाया उसके लिए वह पूरे गांव के लिये प्रेरणा बन गए हैं।

अपनी तैयार की गई भूमि पर वह पिछले कुछ वर्षों से वैज्ञानिक तरीके से बागवानी, नगदी फसल उगाने के साथ ही मत्स्य पालन भी कर रहे हैं। राणा बताते हैं कि कृषि विभाग के सहयोग से तैयार उनके पाॅली हॉउस में वह सेब, आड़ू, पूलम, खुमानी आदि फलों के अलावा टमाटर, फ्रेंचबिन, शिमला मिर्च मशरूम,के साथ सतावर अलेवेरा आदि औषधीय पौधे तैयार कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। घर पर छोटी प्रॉसेसिंग यूनिट लगाकर वह बेकार होने वाले सी ग्रेड के फलों व सब्जियों को भी उपयोग लायक बना रहे हैं। इन फलों से चटनी, अचार, जैम और जूस बनाकर बाजार में सप्लाई कर वह अच्छी रकम कमा लेते हैं। वह बताते हैं कि खेती के कार्य से उनका सलाना टर्न ओवर करीब 7 से 8 लाख तक है।

अपनी निजी कमाई से अलग भरत राणा महिलाओं को स्वरोजगार देने का भी कार्य कर रहे हैं। इस व्यवसाय में उनके साथ क्षेत्र की करीब 400 महिलायें जुड़ी हैं। जो उन्हें सीजन में कच्चा उत्पाद लाकर बेचती हैं। महिलायें जंगल से बुरांस के फूल चुलु का छिलका और बाजार में न बिकने वाले फल व सब्जियां उन्हें सप्लाई कर अपनी आर्थिकी सुधार रही हैं।

राणा को वर्ष 2016 में राज्य स्थापना दिवस पर पूर्ववर्ती सरकार राज्यस्तरीय कृषि पंडित सम्मान से भी नवाज चुकी है। कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मेजरमेंट अजेंसी (आत्मा) और पंतनगर विश्वविद्यालय भी कई बार उन्हें सम्मानित कर चुका है। भरत राणा को वर्ष 2012 में कृषि विभाग का जनपद स्तरीय सम्मान, 2015 में राज्य स्तरीय उत्तराखंड नायक की सम्मान, 2016 में राज्य स्तरीय हरेला घी संक्रांति महोत्सव सम्मान और 10 सितम्बर 2013 को गुजरात कृषि समिट में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

भरत सिंह कहते हैं कि बीते दस वर्षों में उन्होंने सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश का भ्रमण कर नई तकनीक को सीखा और समझा। इसी सीख का वह चकबन्दी भूमि पर प्रयोग कर रहे हैं। जिसके परिणाम सबके समाने है। वह यह भी कहते हैं कि आज के युवा कृषि क्षेत्र में सरकार के सहयोग से कार्य कर पलायन व बेरोजगारी की समस्या पर जीत हासिल कर सकते हैं।

Key Words : Uttarakhand, Nougawn, Himrol Village, waste land Fertile, Bharat Rana

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