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बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद – बदरी मंदिर रवाना हुई डोली

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बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को दोपहर पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए गए। इस मौके पर 5237 श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण के दर्शन किए। कपाट बंद होने से पहले मंदिर के पुजारियों ने परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की। भगवान बदरी नारायण की चल विग्रह उत्सव डोली बुधवार को अपने शीतकालीन पूजा स्थल योगध्यान बदरी मंदिर के लिए रवाना होगी।

बदरीनाथ धाम में मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने नित्य पूजा और अभिषेक व महाभिषेक संपन्न कराया गया। इसके बाद धाम के भगवान का फूलों का श्रृंगार उतारने के बाद उनके शरीर पर माणा गांव की महिलाएं द्वारा तैयार घृत कंबल उड़ाया गया, फिर भगवान के बाल सखा उद्धव जी व देवताओं के खजांची कुबेर जी को गर्भगृह से बाहर लाया गया। उद्धव रावल के निवास स्थान और कुबेर बामणी गांव के नंदा देवी मंदिर में रात्रि विश्राम करेंगे। आज भगवान की उत्सव डोली के साथ उद्धव व कुबेर और आद्य शंकराचार्य की गद्दी को पांडुकेश्वर स्थित योग-ध्यान बदरी मंदिर लाया जाएगा।

कपाटबंदी के अवसर पर गढ़वाल स्काउट के बैंड की मधुर धुनों पर पूरी बदरीशपुरी भक्तिमय हो गई। धाम में सेना के साथ ही विभिन्न संस्थाओं की ओर से भंडारे लगाए गए थे। जिनमें चमोली जिले में उत्पादित झंगोरे की खीर को श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से ग्रहण किया। कपाटबंदी के लिए पूरी बदरीशपुरी को फूलों से सजाया गया था।

इस मौके पर धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी, केदारनाथ विधायक मनोज रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, सीईओ बीडी सिंह, मंदिर अधिकारी राजेंद्र सिंह चैहान, मेहता व भंडारी थोक समेत मंदिर समिति के अधिकारी मौजूद थे।

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